birth and death of stars in hindi


  Stars क्या होता है। क्या आप ने कभी सोचा है कि, जो हमें आसमान में छोटे-छोटे चमकते हुए दिखाई देते है वह वास्तव में क्या है। और वह इतने छोटे क्यो दिकाई देते है। क्या आप जानते है कि सूर्य भी एक Stars है। अब प्रश्न यह आता है कि अगर सूर्य एक Stars है तो सूर्य हमें इतना गर्म, और वह कैसे दिन व रात में योगदान देता है। और जो Stars में दिखाई देते है वह क्यो हमें उष्मा और प्रकाश में योगदान देते है।




what is the definition of stars


    जिसके पास अपना उष्मा और प्रकाश होता है, उसे तारा कहते है। यह मुख्यतः गैसे से बने होते है। और यह अत्यधिक गर्म होता है। अत्य़धिक गर्म होने के कारण यह उष्मा और प्रकाश का विकिरण करते है। इनके अन्दर परस्पर गुरूत्वाकषर्ण के कारण उनके केन्द्र में नाभिकीय संलयन प्ररम्भ हो जाता है। और यह H को He में बदलने की पक्रिया प्ररम्भ हो जाती है। और इस अवस्था में यह Stars बन जाता है।
 Birth and Death of Stars तारे का जन्म और मृत्यु (जीवनचक्र)

    आकाशगंगा के घूर्णन से ब्रहाम्डां में विध्यमान गैसों का मेघ प्रभावित होता है। तथा परस्पर गुरुत्वाकर्षण के कारण उनके केन्द्र में नाभिकीय संलयन शुरू हो जाता है। और इसके साथ ही हाइड्रोजन के हीलियम में बदलने की प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाता है।


Case 1 :-  केन्द्र में हाइड्रोजन समाप्त होने के कारण केन्द्रीय भाग संकुचित गर्म हो जाता है, लेकिन बाहरी परत में हाइड्रोजन को हिलियम में बदलना जारी रहता है। जो धिरे-धिरे ठण्डा होकर लाल रंग में दिखने लगता है जिसे रक्त दानव Red Giants कहते है।

Case 2 :- इसके बाद हिलियम कार्बन में और कार्बन भारी पदार्थ में, जैसे लोहा में बदलने लगता है, जिसे सुपरनोवा विस्फोट Super nova कहते है।

Case 3 :-  अगर सूर्य ताप का द्रव्यमान 1.4 Ms या 2.765 x 1030 Kg से कम हो तो Stars नाभिकीय शक्ति को खोकर श्वेत वामन White Dwarf में बदल जाता है। जिसे जिवाश्म तारा fossil Star कहते है।

Case 4 : श्वेत वामन ठंडा होकर काला वामन Black Dwarf  में बदल जाता है।

Case 5 :- 1.4 से अधिक द्रव्यमान होने पर, मुक्त घूमने इलेक्ट्राँन अत्यधिक वेग पाकर नाभिक को छोड़कर बाहर की ओर चले जाते है, तथा न्यूटाँन बचे रह जाते है। जिसे न्यूटाँन तारा या पल्सर कहते है।

Case 6 :-  न्यूट्राँन तारा भी असीमित समय तक सिकुड़ता चला जाता है अन्त में वह एक ही बिन्दू पर संकेन्द्रित हो जाते है। जिसे कृष्ण छिद्र या ब्लैक होल कहते है। ब्लैक होल से किसी भी द्रव्य, प्रकाश, किरण का पलायन नहीं हो सकता है।


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