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citizenship in indian constitution in hindi

Citizenship in Indian भारतीय नागरिकता

वर्तमान समय में Citizenship प्रत्येक राष्ट्र एक प्रमुख भाग होता है। जिससे निरधारण किया जाता है कि कोई भी व्यक्ति किस देश का नागरिक (citizenship) है यह नहीं है। Citizenship नागरिकता मुख्यतः दो प्रकार का होता है।
    
    (1) एकल नागरिकता
    (2) दोहरी नागरिकता

एकल नागरिकता का अर्थ यह है कि, जिस देश और राज्य का एक ही नागरिकता हो। जैसे- भारत, ब्रिटेन आदि। लेकिन दोहरी नागरिता का अर्थ यह होता है कि जिस देश और राज्य का अलग-अलग नागरिकता प्रमाण पत्र हो। जैसे- अमेरिका का।

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Indian Constitution (भारतीय संविधान) के भाग-2 में Article (अनुच्छेद) 5 से 11 तक में Citizenship के बारे में बताये गया है। भारत की Citizenship ब्रिटेन के समान एकल नागरिकता का है। भारत की नागरिकता ब्रिटेन से लिया गया है।


Article 5 – संविधान की प्रारम्भ की तारिख से प्रत्येक व्यक्ति इस देश का नागरिक समझा जाएगा,
→ जिसका भारत के राज्य क्षेत्र में अधिवास हो तथा
→ उसका जन्म भारत में हुआ हो या
→ उसके माता-पिता में से किसी का जन्म भारत में हुआ हो।
Article 6 – पाक से भारत को प्रवजन करने वाला व्यक्ति संविधान के प्रारम्भ की तारिख से इस देश का नागरिक समझा जाएगा यदि,
→ वह यह उसके माता-पिता में सो कोई जन्म था। या,
→ 19 जुलाई 1948 से पहले भारत में चला आया था।
Article 7 – भारत से पाक को प्रवजन करने वाला व्यक्ति 1 मार्च 1947 के बाद हो।
Article 8 – भारतीय मूल का व्यक्ति यदि भारत से बाहर निवास करता है तो वह भारत की नागरिकता प्राप्त कर सकेगा।
Article 9 – यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी विदेशी राष्ट्र की नागरिकता ग्रहण करता है तो, भारत की नागरिकता समाप्त हो जाएगी।
Article 10 – नागरिकता के अधिकारो का बना रहाना।
Article 11 – नगरिकता से सम्बन्धित उपबन्धो को विनियमित करने तथा उसकी समाप्ति और अर्जन के लिए विधि बनाने की शक्ति संसद के पास है।

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Article 11 के तहत Citizenship नागरिकता के सम्बन्ध में विधि बनाने की शक्ति संसद के पास है। जिसके तहत संसद द्वारा भारतीय नागरिकता अधिनियम-1955 को पारित किया गया है। इस अधिनियम को समय-समय पर जैसे- 1986, 1992, 2003, 2005 और 2015 में संशोधन किया गया है। जिसमें वर्तमान भारतीय नगारिकता सम्बन्धी प्रावधान किया गया है। भारतीय नगारिकता अधिनियम 1955 के तहत निम्न 5 प्रकार से भारत की Citizenship नागरिकता प्राप्त कि जा सकती है।
(1) जन्म से  By Birth
(2) वंशपरम्परा से By Descent
(3) पंजीकरण से By Registration
(4) देशीयकरण से By Naturalization
(5) भूमि के अर्जन के द्वारा By Acquisition of Land

(1) By Birth जन्म के आधार पर-
जिस भी व्यकित का जन्म 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद भारत में हुआ हो, वह भारत का Citizenship नागरिकता होगा। लोकिन नागरिकता संशोधन अधिनियम 1986के तहत जन्म से नागरिकता के लिए व्यक्ति के जन्म से समय उसके माता-पिता में से किसी एक का भारत का नागरिक होना आवश्यक होगा।

(2) वंशपरम्परा के आधार से (By Descent) –
26 जनवरी 1950 के बाद भारत से बाहर जन्म लेने वाला व्यक्ति भारत का Citizenship नागरिकता हो सकता है, यदि उसके जन्म के समय उसके माता या पितामें से कोई भी एक भारत का Citizenship नागरिकता हो। लेकिन माता के आधार पर विदेशों में जन्में व्यकित को Citizenship नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान नगारिकात संशोधन अधिनियम 1992 के द्वारा जोड़ा गया।

(3) पंजीकरण के द्वारा (By Registration) –
निम्न व्यक्तियों के द्वारा कोई व्यक्ति पंजीकरण द्वारा भारतीय Citizenship नागरिकता ग्रहण कर सकता है जो,
→ भारत के व्यक्ति से यदि कोई महिला विवाह करती है।
→ जिनका जन्म भारत से बाहर हुआ लेकिन भारत से बाहर किसी अन्य देश में निवास कर रहा हो।
→ भारतीय नागरिकों के अवयस्क बच्चे
→ राष्ट्रमण्डल देशों के ऐसे नगारिक जो भारत में रहते हैं यह भारत सरकार की नौकरी करते है।
ऐसे लोग भारत की Citizenship नागरिकता पंजिकरण के द्वारा हेतु आवेदन करने की तिथि से 5 साल (पहले 6 माह) तक भारत में निवास किया हो।

(4) देशीयकरण के द्वारा (By Naturalization) –
यदि कोई विदेशी व्यक्ति जो वयस्क हो, और वह भारत की Citizenship नागरिकता ग्रहण करना चाहता हो और वह भारत में 10 साल से निवास कर रहा हो, भारत सरकार उसे देशीयकरण के माध्यम से भारत की Citizenship नागरिकता का प्रमाण पत्र दे सकता है।

(5) भूमि के अर्जन के द्वारा (By Acquisitions of Land) –
अगर भारत सरकार भारत के बाहर के भू-भाग को अर्जित कर भारत में उसका विलय किया जाता है तो, उस क्षेत्र के निवासी भूमि के अर्जन के द्वारा स्वतः ही भारत के Citizenship नागरिकता प्राप्त हो जाती है।

नागरिकता का अन्त (the Abolition of Citizenship)
भारत के किसी भी भारतीय नागरिक की Citizenship नागरिकता का निम्न तीन प्रकार से किया जा सकता है।
(1) किसी अन्य देश की  नगारिकता ग्रहण करने पर।
(2) नागरिकता का स्वतः परित्याग करने पर।
(3) भारत सरकार के द्वारा नागरिकता से वंचित करने पर।
भारत सरकार किसी भी व्यकित की Citizenship नागरिकता निम्न छः करणों से वंचित कर सकती है।
(1) संविधान के प्रति अनिष्ठा दिखाने पर।
(2) युद्धकाल में शत्रु की सहायता करने पर।
(3) गलत तरह से भारत की नागरिकता प्राप्त करने पर।
(4) पंजीकरण या देशीकरण के द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के 5 साल के अन्दर किसी अन्य देश या सरकार के द्वारा 2 साल की सजा पाने पर।
(5) किसी भारतीय स्त्री द्वारा विदेशी पुरुष से विवाह करने पर।
(6) लगातार भारत से 7 साल तक बहार रहने पर।

दोहरी नागरिकता (Overseas Citizenship of India) –
भारत सरकार के द्वारा दिसम्बर 2003 में लक्ष्मीमल सिंघवी समिति के सिफारिश के आधार पर 2003 – नागरिकता संशोधन विधेयक भरत के संसद के द्वारा पारित किया गया। इसके द्वारा देश से बाहर बसे भारतीय मूल के लोगों को सीमित रूप से भारतीय Citizenship नागरिकता प्राप्त करने का अधिकार दिया गया। जिसे Overseas Citizenship of India (OCI) या दोहरी नागरिकता कहा गया।

इसके तहत विश्व के 16 देशों में बसे भारतीय प्रवासी को Overseas Citizenship Card प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। जिन्हें भारत में बिना पासपोर्ट आने-जाने की स्वतन्त्रता होती है, लेकिन उन्हें मत देने का अधिकार और कोई संवैधानिक पद प्राप्त करने का अधिकार नहीं होता है।

Ram Pal Singh

Hi, This is Ram Pal Singh. I am a Profocinal Blogger and content writer, and Now I am working in the Government Sector in Uttar Pradesh.

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