Emergency provisions in Indian Constitution notes in Hindi

आज हम इस लेख में भारत के एक महत्वपूर्ण भाग Emergency Provisions in Indian Constitution in Hindi में जानेगें जो आगमी Exam के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होगा। 

भारत (Indian) के संविधान (Constitution) में समय और परिस्थिति के अनुसार संघात्म से एकात्मक दोनों रुपों में रुपान्तरित हो सकता है।

लेकिन दूसरी तरफ अमेरिका का संविधान (Constitution) में सभी संघीय व्यवस्थाएं, है जो किसी भी परिस्थिति में ये अपने स्वरूप और आकार में परिवर्तित नहीं हो सकता है|

Emergency provisions in Indian Constitution notes in Hindi

Emergency Provisions in Indian Constitution in Hindi (आपातकालीन प्रवाधान)

भारत (Indian) के संविधान (Constitution) में राष्ट्र की प्रभुता, एकता और अखण्डता की सुरक्षा के लिए एक अनोखी विशेषता आपातकालीन प्रवाधान (Emergency Provisions) को जोड़ा गया है। जो केंद्र को किसी भी असामान्य स्थिति से प्रभावी रूप से निपटने के लिए सक्षम है।

भारत (Indian) के संविधान (constitution) में आपातकालीन प्रवाधान (Emergency Provisions) को भारतीय संविधान (Indian constitution) के भाग-18 के Article 252 से Article 360 के तक है। जिसे जर्मनी के संविधान से लिया गया है।

emergency provisions in India in HIndi
  • अनुच्छेद 352 – आपातकाल की घोषणा।
  • अनुच्छेद 353 – आपातकाल लागू होने के प्रभाव।
  • अनुच्छेद 354 – आपातकाल की घोषणा जारी रहते राजस्व के वितरण से संबंधित प्रावधानों का लागू होना।
  • अनुच्छेद 355 – राज्यों की बाहारी आक्रमण तथा आंतरिक अव्यवस्था से सुरक्षा संबंधी संघ के कर्तव्य।
  • अनुच्छेद 356 – रांज्यो में संवैधानिक तंत्र की विफलता की स्थिति संबंधी प्रावधान।
  • अनुच्छेद 357 – अनुच्छेद 356 के अंतर्गत जारी घोषणा के बाद विधायी शक्तियों का प्रयोग।
  • अनुच्छेद 358 – आपातकाल के समय अनुच्छेद 19 के प्रावधानों का स्थगन।
  • अनुच्छेद 359 – आपातकाल के भाग 3 में प्रदत्त अधिकारों को लागू करना या स्थगित करना।
  • अनुच्छेद 360 – वित्तीय आपातकाल संबंधी प्रावधान।

Type of Emergency Provisions in Indian in Hindi

भारतीय संविधान (Indian Constitution) में तीन प्रकार के आपात काल की परिकल्पना की गई है।

  1. अनुच्छेद 352
  2. अनुच्छेद 356
  3. अनुच्छेद 360
  • Art 352 युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशक्त विद्रोह में उत्पन्न आपात अथवा राष्ट्रीय आपात काल।
  • Art 356 राज्यों में संवैधानिक तंत्र के विफल होने से उत्पन्न आपात, अथवा राष्ट्रपति शासन।
  • Art 360 वित्तीय आपात काल।

राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency)

National Emergency भारतीय संविधान के Art 352 में दिया गया है,

लेकिन National Emergency आपात की उद्घोषणा को अनुच्छेद 353 तथा अनुच्छेद 354 में National Emergency के प्रभाव का उल्लेख किया गया है।

Proclamation of National Emergency (राष्ट्रीय आपात काल के उद्घोषणा या उसके आधार) :-

भारतीय संविधान (Indian Constituion) के Art 352 के तहत भारत में राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा भारत के राष्ट्रपति के द्वारा की जा सकती है।

जब भारत के राष्ट्रपति को यह समाधान हो जाता है कि, भारत या भारत के किसी एक भाग की सुरक्षा को युद्ध अथवा बाह्य आक्रमण अथवा सशस्त्र विद्रोह के कारण खतरा उत्पन्न हो गया हो तो Art 352 के तहत भारत के वर्तमान राष्ट्रपति भारत या भारत के उस भाग में राष्ट्रीय आपात काल को लागू कर सकते है।

भारत का राष्ट्रपति भारत में National Emergency (राष्ट्रीय आपातकाल) की उद्घोषणा केवल और केवल मंत्रिमंडल की एक लिखित सिफारिश प्राप्त होने पर ही कर सकता है।

इसका अर्थ यह है कि, National Emergency (राष्ट्रीय आपातकाल) की घोषणा केवल मंत्रिमंजल की सहमति से ही हो सकता है, न कि प्रधानमंत्री की सलाह पर।

लेकिन सन् 1978 से पहले भारत में National Emergency (राष्ट्रीय आपातकाल)प्रधानमंत्री अपने स्वेछा के अनुसार लागू कर सकता था।

जैसे – सन् 1975 में प्रधानमंत्री इंदिरा गंधी के द्वारा लागू आपात काल। लेकिन संविधान के इस व्यवस्था को 44 वें संविधान संशोधन अधिनिय सन् 1978 के द्वारा समाप्त कर दिया गया।

जब National Emergency (राष्ट्रीय आपातकाल) की घोषणा युद्ध अथवा बाह्य आक्रमण के आधार पर की जाती है, तब इसे बाह्य आपातकाल के नाम से जाना जाता है।

लेकिन दूसरी ओर, जब इसकी घोषणा सशस्त्र विद्रोह के आधार पर की जाती है तब इसे आंतरिक आपात काल के नाम से जाना जाता है।

हम आप को यह बता दे कि मूल संविधान (26 जनवरी 1950) में सशस्त्र विद्रोह (Armed Vebellion) शब्द के स्थान पर आन्तरिक अशान्ति (Internal Disturbance) शब्द था।

जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम 1978 के द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया।

नोट-38 वां संविधान संशोधन अधिनियम सन् 1975 में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा को न्यायिक समीक्षा की परिधि से बाहर रखा गया था। लेकिन 44 वें संविधान संशोधन अधिनियम सन् 1978 के द्वारा इसको समाप्त कर दिया गया।

Approval of Proclamation (उद्घोषणा का अनुमोदन) :-

भारत में National Emergency (राष्ट्रीय आपातकाल) की उद्घोषणा भारत के दोनों सदनो के द्वारा विशेष बहुमत से किया जाता है।

National Emergency (राष्ट्रीय आपातकाल) को यदि दोनों सदन एक माह के भीतक अनुमोदित नहीं करते हैं, तो उद्घोषणा स्वतः ही समाप्त हो जाता है।

लेकिन अगर National Emergency (राष्ट्रीय आपातकाल) की उद्घोषणा उस समय की जाती है जब, लोकसभा विघटित हो या फिर लोकसभा एक माह के भीतर विघटन हो जाता है,

और राज्यसभा के द्वारा उसे अनुमोदित कर दिया गया हो तो नये लोकसभा के पुनर्गठन के बाद होने वाली प्रथम बैठक से 30 दिन के भीतर उसे लोकसभा द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए, अन्यथा वह प्रवर्तन में नहीं होगा।

उद्घोषणा की अवधि (Period of Proclametion)

भारत में National Emergency (राष्ट्रीय आपातकाल) एक बार अनुमोदित या लागू हो जाने पर 6 माह तक के लिए होता है।

इस 6 माह की अवधि की गणना, दूसरे सदने के द्वारा संकल्प के पारित किये जाने की तिथि से कि जाती है।

अगर इसे 6 माह के बाद भी जारी रखना है तो भारत के संसद को फिर से दोनों सदने में अनुमोदन के बाद रखा जा सकता है।

अर्थात् संसद द्वारा अनुमोदित हो जाने पर उद्घोषणा 6-6 माह की अवधि के लिए आगे जारी रहती है।

उद्घोषणा की वापसी (Revoketion of Proclamation) ः-

  • भारत के राष्ट्रपति के द्वारा आपातकाल की उद्घोषणा किसी भी समय एक दूसरी उद्घोषणा से समाप्त की जा सकती है। एसी उद्घोषणा को संसदीय अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होती है।
  • भारतीय संविधान के अनुसार भारत में National Emergency (राष्ट्रीय आपातकाल) की उद्घोषणा को लोकसभा को भी वापस कराने का अधिकार दिया गया है।
  • “यदि लोकसभा साधारण बहुमत से उद्घोषणा वापस करने का संकल्प पारित कर देती है, तो राष्ट्रपति उद्घोषणा को वापस लेने के लिए बाध्य होता है। या,
  •  यदि लोकसभा अपने कुल सदस्य की संख्या का 1/10 भाग सदस्यों द्वारा आपात काल की उद्घोषणा को वापस लेने वाले संकल्प को प्रस्तावित करने के आशय से एक लिखित सूचना, जब लोकसभा का सत्र में हो तो लोकसभा के अध्यक्ष को या,
  • लोकसभा का सत्र में न हो तो भारत के वर्तमान राष्ट्रपति को। तो भारत के राष्ट्रपति या लोकसभा के अध्यक्ष 14 दिन के भीतर संकल्प पर विचार के लिए एक विशेष बैठक को बुलाते है। (अनुच्छेद 252 (8)) के तहत।

राज्यों में राष्ट्रपति शासन (President Rule in the State Article 356)

भारतीय संविधान के अनुसार भारत के राज्यों के संवैधानिक तंत्र के विफल हो जाने पर भारत के राष्ट्रपति के द्वारा अनुच्छेद 356 के तहत राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है।

जिसे हम साधारण बोल-चाल की भाषा में राष्ट्रपति शासन के नाम से जाना जाता है।

राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा (Proclamation of President Rule)

भारत में राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 365 (क) के तहत भारत के राष्ट्रपति के द्वारा जारी किया जाता है।

भारत के राष्ट्रपति को जब यह समाधान हो जाये कि उस राज्य का शासन संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता, या

उस राज्य के राज्यपाल से प्रतिवेदन मिलने पर, भारत के राष्ट्रपति उस राज्य में राष्ट्रपति शासन को अनुच्छेद 365 के तहत लागू कर सकते है।

राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा का अनुमोदन (Approval of Proclamention)

भारत में राष्ट्रपति शासन को अनुच्छेद 356 के तहत जारी किया जाता है। जिसे संसद के दोनों सदनों के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है और

संसद के सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत के द्वारा दो माह के अन्दर पारित करना होता है।

नहीं तो वह स्वतः समाप्त हो जाता है। यदि राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा उस समय की जाती है, जब लोकसभा का विघटन हो गया हो या फिर

लोकसभा का विघटन उद्घोषणा का अनुमोदन किये बिना दो माह के भीतर हो जाता है, और राज्यसभा उसे अनुमोदित कर दिया हो तो

नये लोकसभा के गठन के प्रथम बैठक के 30 दिन के अन्दर उसपर अनुमोदित किया जाना चाहिए। नहीं तो वह 30 दिन के अन्दर स्वतः ही समाप्त हो जायेगा।

राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा की अवधि (Period of Indian President Rule  of Proclamation) ः-

भारत में राष्ट्रपति शासन को जारी किये जाने की तिथि से दो माह तक होता है।

लेकिन अगर भारत के संसद के दोनों सदनों के द्वारा इसे साधारण बहुमत से दो माह के भीतर अनुमोदित तक देते है तो, यह उद्घोषणा जारी किये जाने के तिथि से 6 माह का होगा।

भारत के संसद को ऐसा लगता है कि इसे और आगे बढ़ाना चाहिए तो संसद उसे पुनः 6-6 माह के लिए उसे बढ़ा सकता है।

लेकिन उसे किसी भी दशा में 3 वर्ष से अधिक अवधि तक प्रर्वतन में नहीं रखा जा सकता है।

Difference between article 352 and article 356 in Hindi (अनुच्छेद 352 और अनुच्छेद 356 में अन्तर) :-

भारत के संविधान में आपातकाल के अनुच्छेद 352 (Article 352) और अनुच्छेद 356 (Article 356) सबसे महत्वपूर्ण अनुच्छेद में से एक है। इन दोनों अनुच्छेद में अन्तर बहुत ज्यादा है, जो निम्न है।

➥ भारत में अनुच्छेद 352 (राष्ट्रीय आपातकाल) को तब लगाया जाता है जब भारत में अथवा भारत के किसी एक भाग में सुरक्षा, बाह्य आक्रमण या फिर सशस्त्र विद्रोह का खतरा होता है।

लेकिन अनुच्छेद 356 को भारत में तब लगाया जाता है जब भारत के किसी में उस राज्यों के सरकार भारत के संविधान के प्रावधानों के अनुसार कार्य नहीं करते है।

➥ अनुच्छेद 352 (Article 352) के तहत भारत के राज्यों की विधायी और प्रशासनिक शक्तियों केंद्र को प्राप्त हो जाती है।

लेकिन अनुच्छेद 356 (Article 356) के तहत राज्यों की शासन व्यवस्था राष्ट्रपति के हाथों में चला जाता है और भारत का राष्ट्रपति उसकी शासन को राज्यपाल के द्वारा चलाता है।

➥ अनुच्छेद 352 (Article 352) के तहत भारत की संसद राज्यों के विषय में स्वयं कानून को बनाती है।

लेकिन अनुच्छेद 356 (Article 356) के द्वारा संसद राज्यों के लिए कानून बनाने का अधिकार भारत के राष्ट्रपति या उनके द्वार कोई नियुक्त अन्य किसी प्राधिकारी को दिया जाता है।

➥ अनुच्छेद 352 (Article 352) का समयावदि निश्चित नहीं है, जिसे प्रत्येक 6-6 माह के बाद संसद के अनुमति के बाद बढाया जा सकता है,

लेकिन अनुच्छेद 356 (Article 356) के तहत इसकी अधिक्तम समय सिमा 3 साल होती है।

➥ अनुच्छेद 352 (Article 352) को लोकसभा एक प्रस्ताव पारित कर के इस घोषणा को वापस ले सकता है।

लेकिन अनुच्छेद 356 (Article 356) ऐसा प्रावधान नहीं है। इसे भारत के राष्ट्रपति स्वयं वापस ले सकता है।

➥ अनुच्छेद 352 (Article 352) और अनुच्छेद 356 दोनों को लागू होने पर भारत के आम नागरिकों को प्रभावित करते है। सिर्फ अन्तर यह है कि अनुच्छेद 352 के तहत भारत या भारत के किसी एक भाग में

लेकिन अनुच्छेद 356 (Article 356) के तहत भारत के राज्यों पर इसका असर होता है।

➥ अनुच्छेद 352 (Article 352) के तहत भारत के सभी राज्यों तथा केन्द्रों के बीच संबंध में परिवर्तित होते है,

लेकिन अनुच्छेद 356 (Article 356) के तहत केवल उस राज्यों के संबंध में परिवर्तित होता है जहाँ पर यह लागू रहता है।

➥ अनुच्छेद 352 (Article 352) की उद्घोषणा पर अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार स्वतः निलम्बित हो जाते है। तथा अन्य मूल अधिकारों को भारत का राष्ट्रपति (अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 को छोड़ कर) निलम्बित कर सकता है।

लेकिन अनुच्छेद 356 (Article 356) में मूल अधिकारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

➥ अनुच्छेद 352 (Article 352) के तहत उद्घोषणा भारत के संसद के द्वारा विशेष बहुमत के द्वारा किया जाता है

लेकिन अनुच्छेद 356 (Article 356) के तहत उद्घोषणा भारत के संसद के साधारण बहुमत के द्वारा किया जाता है।

वित्तीय आपातकाल (Financial Emergency) :-

भारत के संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत भारत में वित्तीय आपातकाल का उल्लेख किया गया है।

यहा भारत का तीसरे प्रकार का आपातकाल है। भारत के राष्ट्रपति भारत में अनुच्छेद 360 के अनुसार भारत में वित्तीय आपातकाल की घोषणा कर सकते है।

भारत में वित्तीय आपातकाल को तब लगाय जाता है जब भारत के राष्ट्रपति को यह समाधान हो जाता है कि भारत में अब ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे कि भारत या उसके किसी भाग का वित्तीय स्थायित्व अथवा साख संकट मे हो।

 नोट- भारत का राष्ट्रपति भारत में वित्तीय आपातकाल की घोषणा बिना भारत के केंन्द्रीय मंत्रीमंण्ल के सलाह पर करता है। किन्तु इसके लिए मंत्रीमंण्ड को भारत को एक लिखित सलाह आवश्यक नहीं है।

भारत में वित्तीय आपातकाल की उद्घोषणा की अवधि (Period of Indian Financial Emergency of Proclamation) :-

भारत में वित्तीय आपातकाल की उद्घोषणा भारत के संसद के अनुमोदन के बिना दो माह तक लागू रहती है।

लेकिन भारत की संसद अगर दो माह पहले एक साधारण बहुमत के द्वारा उसे उद्घोषणा को अनुमोदित कर देती है तो वह अनिश्चित काल तक लागू रहेगी, जब तक भारत की संसद उसे वापस न ले।

भारत में वित्तीय आपातकाल की उद्घोषणा के लिए बार-बार अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होती है।

आगर भारत वित्तीय आपातकाल के समय भारत का लोकसभा भंग हो या वित्तीय आपातकाल लागू होने के 2 माह के भीतर भंग हो जाता है तो,

राज्यसभा उसे लागू कर सकती है लेकिन जब नई लोकलभा का गठन होता है तो लोकसभा के पहले बैठक के 30 दिन के अंदर उसे लागू करना होगा नहीं तो वित्तीय आपातकाल समाप्त हो जाती है।

नोट- भारत में अब तक एक भी बार वित्तीय आपातकाल को लागू नहीं किया गया है।

What is Emergency Provisions in Indian Constitution in Hindi?

(आपातकालीन प्रवाधान)
भारत (Indian) के संविधान (Constitution) में राष्ट्र की प्रभुता, एकता और अखण्डता की सुरक्षा के लिए एक अनोखी विशेषता आपातकालीन प्रवाधान (Emergency Provisions) को जोड़ा गया है। जो केंद्र को किसी भी असामान्य स्थिति से प्रभावी रूप से निपटने के लिए सक्षम है।
भारत (Indian) के संविधान (constitution) में आपातकालीन प्रवाधान (Emergency Provisions) को भारतीय संविधान (Indian constitution) के भाग-18 के Article 252 से Article 360 के तक है। जिसे जर्मनी के संविधान से लिया गया है।

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Ram Pal Singh

Hi, This is Ram Pal Singh. I am a Profocinal Blogger and content writer, and Now I am working in the Government Sector in Uttar Pradesh.

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