Fundamental rights in Hindi with articles | Fundamental rights in Hindi meaning

Fundamental Rights in Hindi मूल अधिकार का तात्यर्य राजनीतिक लोकतंत्र के आदर्शों की उन्नीत है। यह अधिकार देश में व्यवस्था बनाए रखने एवं राज्यों के कठोर नियमों के खिलाफ नागरिकों की आजादी की सुरक्षा करते है।

History of Fundamental Rights in Hindi मूल अधिकार का इतिहास

विश्व में Fundamental Rights मूल अधिकार का सर्वप्रथम विकास ब्रिटेन में हुआ था। सन् 1215 ई0. में ब्रिटेने के राजा “जान” के द्वारा एक अधिकार पत्र प्रस्तुत किया गया जिसे Magna Carta के नाम से जाना गया।

Magna Carta Fundamental Right मूल अधिकार के सम्बन्धी में विश्व का प्रथम लिखित दस्तावेज है।

उसके बाद सन् 1689 में ब्रिटेन के द्वारा एक और दस्तावेज Bill of Right प्रस्तुत किया गया। सन् 1791 ई0. में अमेरिका के द्वारा Bill of Right (अधिकार पत्र) को एक अमेरिकी संविधान संशोधन के द्वारा अमेरिका के संविधान में जोड़ गया।

इस तरह अमेरिका विश्व का प्रथम देश अमेरिका बना जिसने Fundamental Right मूल अधिकार को संविधान में इसका प्रावधान किया।

भारत में Fundamental Right in Hindi मूल अधिकार की मांग-
भारत में Fundamental Right मूल अधिकार की सर्वप्रथम मांग बाल गंगाधर तिलक के द्वारा सन् 1895 में संविधान विधेयक के माद्यम से किया गया था।
⟾ कांग्रेस के द्वारा Fundamental Right मूल अधिकार की मांग 1917-1919 के दौरान।
⟾ सन् 1925 में श्रीमती एनी बेसेण्ट के द्वारा कामनवेल्थ ऑफ इंडिया बिल के माध्यम से।
⟾ 1928 में मोति लाल नेहरू जी ने नेहरू रिपोट के द्वारा।
⟾ सन् 1931 में महात्मा गांधी जी के द्वार दूसरे गोलमेल सम्मेलन के दौरान मांग किया लेकिन सन् 1934 में सरकार की संयुक्त संसदीय समिति ने उसे अस्वीकार कर दिया।
भारत के Fundamental Right मूल अधिकार (26 Jan 1950) में कूल सात Fundamental Right मूल अधिकार था। जो निम्न है।
S/N
मूल अधिकार
अनुच्छेद कब से कब तक
कूल अनुच्छेद
1
समता या समानता का अधिकार
Art 14 – 18 तक
कूल 5 Art
2
स्वतंत्रता का अधिकार
Art 19 – 22 तक
कूल 4 Art
3
शोषण के विरुद्ध अधिकार
Art 23 और 24
कूल 2 Art
4
धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार
Art 25 से 28 तक
कूल 4 Art
5
संस्कृति और शिक्षा का अधिकार
Art 29 और 30
कूल 2 Art
6
संपत्ति का अधिकार
Art 31
कूल 1 Art
7
सांविधानिक उपचारों का अधिकार
Art 32
कूल 1 Art

संपत्ति का अधिकार –

संपत्ति के अधिकार को Fundamental Right मूल अधिकार के द्वारा Fundamental Right मूल अधिकारकी सूची में से समाप्त कर दिया गया है।
इसे भारतीय संविधान के भाग 12 के अनुच्छेद 300 (क) के तहत एक कानूनी अधिकार बना दिया गया है। इस तरह वर्तमान में कूल छःFundamental Right मूल अधिकार है।
वर्तमान समय में भारतीय संविधान में कूल 6 मूल अधिकार Fundamental Right मूल अधिकार है जो निम्न है।

fundamental rights in hindi with articles
Fundamental Rights in Hindi मूल अधिकार
S/N
मूल अधिकार
अनुच्छेद कब से कब तक
कूल अनुच्छेद
1
समता या समानता का अधिकार
Art 14, 15, 16, 17, 18
कूल 5 Art
2
स्वतंत्रता का अधिकार
Art 19, 20, 21, 21
कूल 4 Art
3
शोषण के विरुद्ध अधिकार
Art 23 और 24
कूल 2 Art
4
धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार
Art 25, 26, 27, 28
कूल 4 Art
5
संस्कृति और शिक्षा का अधिकार
Art 29 और 30
कूल 2 Art
6
सांविधानिक उपचारों का अधिकार
Art 32
कूल 1 Art

मौलिक अधिकारों को याद करने के लिए Trick –

समस्त शोध संस्कृति के उपचार है।

सम – समानता का अधिकार
➥ स्त – स्वतंत्रता का अधिकार।
➥ शो – शोषण के विरूद्ध अधिकार।
➥ ध – धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार।
➥ संस्कृति – संस्कृति का अधिकार।
➥ उपचार – सांविधानिक उपचारों का अधिकार।

citizenship in Indian constitution in Hindi

अनुच्छेद 13 – मूल अधिकार से असंगत या उनका अल्पीकरण करने वाली विधियाँ।
अनुच्छेद 14 – राज्य किसी भी व्यक्ति को विधि के समक्ष समानता से वंचित नहीं करेगा तथा सबी को विधियो के समान संरक्षण प्रदान करेगा।

(1) समता और समनाता का अधिकार (अनुच्छेद 14 -18)

⟼ Article 14 – विधि के समका समक्ष और विधियों समान संरक्षण।
⟼ Article 15 – धर्म, मूल वंश, लिंग और जन्म स्थान के आधार पर विभेद का प्रतिक्षेद।
⟼ Article 16 – लोक नियोजन के विषय में अवसर की समानता।
⟼ Article 17 – अस्पृश्यता का अंत।
⟼ Article 18 – सेना और विद्या संबंधी सम्मान को सिवाए सभी उपाधियों पर रोक।

(2) स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्चेद 19 – 22)

⟼ Article19 –Fundamental Right मूल अधिकार में कूल 7 अधिकार थे, लेकिन संपत्ति को खरीदने और अधिग्रहण करने या बेच देने के अधिकार को 44वें संविधान संशोधन अधिनियम 1978 को समाप्त कर दिया गया।
(1) वाक् एवं अभिव्यकित की स्वतंत्रता (इसके तहत प्रेस और RTI की स्वतंत्रता भी निहीत है।)
(2) शांतिपूर्वक और निरायुद्ध सम्मेलन का अधिकार।
(3) संगम संघ या सहकारी समितियों का बनाने का अधिकार।
(4) भारत के राज्य क्षेत्र के किसी भाग में अबाध संचरण का अधिकार।
(5) भारत के राज्य क्षेत्र के किसी भाग में निर्बाध बस जाने या निवास करने का अधिकार (अपवाद –J&K)
(6) कोई भी वृत्ति, व्यपार या कारोबार करने का अधिकार।
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⟼ Article20 – किसी भी अभियुक्त या दोषी के अपराध के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण तीन व्यवस्थाएं कि है.
(1) एक अपराध के लिए एक बार सजा पाना।
(2) अपराध करते समय जो कानून है, उसी के तहत सजा पाना।
(3) किसी भी व्यक्ति को स्वयं के विरूद्ध न्यायालय में गवाही देने के लिए बाध्य नहीं कियी जायेगा।
⟼ Article21 – किसी भी व्यक्ति को उसके प्राण और दैहिक स्वतंन्त्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा, अन्यथा नहीं।
⟼ Article21(A) –6 से 14 वर्ष के आयु के समस्त बच्चों को ऐसे ढ़ग से जैसे कि राज्य विधि के द्वारा अवधारित करें, निःशुल्क तथा अनिर्वाय शिक्षा उपलब्ध करेगा। इसे 86 वां संविधान संशोधन अधिनियम 2002 के द्वारा जोड़ा गया।
⟼ Article22 – कुछ दशाओं में गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण।
(1) यदि व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता हैं तो, उसे यथाशीघ्र गिरफ्तारी का कारण बताया जाएगा तथा उसे अपनी प्रतिरक्षा के लिए विधि के अनुसार परामर्श करने का अधिकार होगा।
(2) उसे गिरफ्तारी के समय से 24 घण्टे के अन्दर निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा।
(3) अपने रुचि के विधि व्यवसायी (अधिवक्ता) से परामर्श एवं बचाव का अधिकार।

(3) शोषण के विरूद्ध अधिकार (Art 23 और 24)
⟼ Article23 – मानव के दुव्रर्यापार, बेगार तथा इसी प्रकार के अन्य बलात-श्रम का प्रतिषेध किया जाता है।
⟼ Article24 – 14 वर्ष के कम आयु के बालकों को किसी कारखाने, या परिसंकटमय स्थानों पर नियोजित नहीं किया जाएगा।

(4) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (Art 25 से 28 तक)

⟼ Article25 – प्रत्येक व्यक्ति को अपने अन्तःकरण के अनुसार किसी भी धर्म को अबाध रूप से मानने आचरण करने तथा प्रचार करने का स्वतंत्रता है।
⟼ Article26 – धार्मिक कार्यों का प्रबन्धन की स्वतन्त्रता होगा।
⟼ Article27 – किसी विशेष धर्म की अभिव्यक्ति के लिए कर देने की स्वतन्त्रता।
नोट- यदि राज्य किसी सम्प्रदाय के लिए किसी कार्यक्रम का आयोजन करता है तो राज्य ऐसे कार्य के लिए उस धार्मिक सम्रप्रदाय को लोगों से शुल्क वसूल सकता है।
⟼ Article28 – राज्य द्वारा स्थापित शिक्षण संस्था में धार्मिक शिक्षा प्रदान नहीं किया जाएगा।
यदि किसी ट्रस्ट ने शिक्षण संस्था को स्थापित किया है, जिसका प्रशासन राज्य करता है, वहां धार्मिक शिक्षा प्रदान किया जाएगा।
धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना मे साम्मिलित होने की स्वतन्त्रता।

(5) संस्कृति एंव शिक्षा सम्बन्धि अधिकार (अनुच्छेद 29 – 30)

⟼ Article29 – भारत के राज्य क्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किन्हीं अनुभाग को अपनी भाषा लिपि तथा संस्कृति बनाये रखने का अधिकार।
⟼ Article30 – धर्म या भाषा पर आधारित प्रत्येक अल्पसंख्यक को अपनी रूचि की शिक्षण संस्था को स्थापित करने तथा प्रशासन करने का अधिकार।

(6) संवैधानिक उपचारों का अधिकार :-

⟼ Article32 –डा0 भीमराव अम्बेडकर ने संवैधानिक उपचारों के अधिकार को संविधान का मूल आत्मा कहा है।
यदि राज्य द्वारा मूल अधिकारों का उल्लघन किया जाए तो इसके विरूद्ध उपचार प्राप्त करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 32 के अधीन उच्चतम न्यायालय में तथा अनुच्छेद 226 के अधीन उच्च न्यायालयमें रिक्त याचिका दाखिल करने के अधिकार नागरिकों को प्रदान किये गये है।
संवैधानिक उपचारों की संख्या – भारतीय संविधान में कूल 5 प्रकार के रित याचिका दाखिल कर सकते है।
 (1) बन्दी प्रत्यक्षीकरण
 (2) परमादेश
 (3) प्रतिषेध
 (4) उत्प्रेषण
 (5) अधिकार प्रच्छा।

⟼ Article 33 – यदि किसी क्षेत्र मे सशस्त्र सैनिको को या अर्थ सैनिकों बलो को नियोजित किया जाता है। जिससे मूल अधिकार प्रभावित किया जाता है। जिससे मूल अधिकार प्रभावित हो तो ऐसी स्थिति में उस मूल अधिकार को लेकर सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय में कोई रिट दायर किया जा सकता है।

⟼ Article 34 – यदि किसी क्षेत्र में सैन्य कानून की घोषणा की जाती है। जिससे मूल अधिकार प्रभावित होता है, तो ऐसी स्थिति में मूल अधिकार को कोई वरीयता नही दी जाएगी।

What are the 7 fundamental rights of India in Hindi?

 
भारत के Fundamental Right मूल अधिकार (26 Jan 1950) में कूल सात Fundamental Right मूल अधिकार था। जो निम्न है।

1 समता या समानता का अधिकार
Art 14 – 18 तक

2 स्वतंत्रता का अधिकार
Art 19 – 22 तक

3 शोषण के विरुद्ध अधिकार
Art 23 और 24

4 धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार
Art 25 से 28 तक

5 संस्कृति और शिक्षा का अधिकार
Art 29 और 30

6 संपत्ति का अधिकार
Art 31

7 सांविधानिक उपचारों का अधिकार
Art 32

What is the Manning of Fundamental Rights in Hindi?

Fundamental Rights in Hindi मूल अधिकार का तात्यर्य राजनीतिक लोकतंत्र के आदर्शों की उन्नीत है। यह अधिकार देश में व्यवस्था बनाए रखने एवं राज्यों के कठोर नियमों के खिलाफ नागरिकों की आजादी की सुरक्षा करते है।

What is the History of Fundamental Rights in Hindi?

विश्व में Fundamental Rights मूल अधिकार का सर्वप्रथम विकास ब्रिटेन में हुआ था। सन् 1215 ई0. में ब्रिटेने के राजा “जान” के द्वारा एक अधिकार पत्र प्रस्तुत किया गया जिसे Magna Carta के नाम से जाना गया।

Magna Carta Fundamental Right मूल अधिकार के सम्बन्धी में विश्व का प्रथम लिखित दस्तावेज है।

उसके बाद सन् 1689 में ब्रिटेन के द्वारा एक और दस्तावेज Bill of Right प्रस्तुत किया गया। सन् 1791 ई0. में अमेरिका के द्वारा Bill of Right (अधिकार पत्र) को एक अमेरिकी संविधान संशोधन के द्वारा अमेरिका के संविधान में जोड़ गया।

इस तरह अमेरिका विश्व का प्रथम देश अमेरिका बना जिसने Fundamental Right मूल अधिकार को संविधान में इसका प्रावधान किया।

What is Article 21 of the Constitution in Hindi?

किसी भी व्यक्ति को उसके प्राण और दैहिक स्वतंन्त्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा, अन्यथा नहीं।

What does Article 20 say in Hindi?

किसी भी अभियुक्त या दोषी के अपराध के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण तीन व्यवस्थाएं कि है.
 
(1) एक अपराध के लिए एक बार सजा पाना।
 
(2) अपराध करते समय जो कानून है, उसी के तहत सजा पाना।
 
(3) किसी भी व्यक्ति को स्वयं के विरूद्ध न्यायालय में गवाही देने के लिए बाध्य नहीं कियी जायेगा।

What does Article 23 say in Hindi?

मानव के दुव्रर्यापार, बेगार तथा इसी प्रकार के अन्य बलात-श्रम का प्रतिषेध किया जाता है।

What is the difference between article 32 and 226 in Hindi?

यदि राज्य द्वारा मूल अधिकारों का उल्लघन किया जाए तो इसके विरूद्ध उपचार प्राप्त करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 32 के अधीन उच्चतम न्यायालय में तथा अनुच्छेद 226 के अधीन उच्च न्यायालयमें रिक्त याचिका दाखिल करने के अधिकार नागरिकों को प्रदान किये गये है।

What does article 32 of Indian constitution say in Hindi?

” संवैधानिक उपचारों के अधिकार “
डा0 भीमराव अम्बेडकर ने संवैधानिक उपचारों के अधिकार को संविधान का मूल आत्मा कहा है।

संवैधानिक उपचारों की संख्या – भारतीय संविधान में कूल 5 प्रकार के रित याचिका दाखिल कर सकते है।
 
 (1) बन्दी प्रत्यक्षीकरण
 (2) परमादेश
 (3) प्रतिषेध
 (4) उत्प्रेषण
 (5) अधिकार प्रच्छा।

Ram Pal Singh

Hi, This is Ram Pal Singh. I am a Profocinal Blogger and content writer, and Now I am working in the Government Sector in Uttar Pradesh.

This Post Has 2 Comments

  1. Vinay

    Thanks sir

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