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Hindi Varnamala and Varn Vichar

दोस्तों हमरे इस लेख में हम हिन्दीं भाषा के सबसे प्रमुख अध्याय हिन्दी वर्णमाला और उसके वर्ण विचार (Hindi Varnamala and Varn Vichar) के बारे में जानने जा रहे है। जहाँ से आप के सभी परिक्षा में जैसे- UPSC, UPPCS, ARO & RO, UPSSSC, UP Primary Teacher, UP Police SI में कम से कम 3 से 5 मार्क के प्रश्नों आते है।

हमारा यह लेख आप को बहुत ही आसानी से समझा और सारे महत्वपूर्ण प्रश्नों को संकलित किया गया है। जिसके माध्यम से आप इसे बहुत ही सरल और समझ सकते है।

ध्वनि – भाषा की सबसे छोटी इकाई को ध्वनि कहते है।

वर्ण – लिखित चिन्ह को वर्ण कहा जाता है। अर्थात, वर्ण भाषिक ध्वनियों का लिखित रूप होता है।

वर्णमाला – वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते है।



ड़


ढ़ड़ढ़








क्षत्रज्ञश्र
ज़फ़










उच्चारण के अधार पर वर्णमाला दो प्रकार का होता है।

  1. Swar
  2. Vyanjan.
type of hindi varnamala

स्वर (Swar)

जिन वर्णों का उच्चारण बिना किसी अवरोध के तथा बिना किसी दूसरे वर्णों की सहायता से होता है, उन्हें स्वर (Swar) कहा जाता है।

हिन्दीं वर्णमाला में कूल 11 स्वर होते है। जिनकों 3 भागों में बाटां गया है।

(1) हृस्व स्वर या मूल स्वर

(2) दीर्घ स्वर।

(3) संयुक्त स्वर|

(1) हृस्य या मूल स्वर –

हृस्य स्वर को मूल स्वर भी कहते है। जिन स्वरों के उच्चारण में कम से कम समय लगता है। उन्हें हृस्व स्वर कहते है। जिनकी कूल संख्या 4 होता है।

(2) दीर्घ स्वर –

जिन स्वरों के उच्चारण में हृस्व स्वरों से अधिक समय लगता है, उन्हें हृस्व स्वर कहते हैं। या,

दीर्घ स्वर मूल स्वरों के संयोग से बने होते है। या, दो समान मूल या हृस्व स्वरों के योग से बने स्वर को दीर्घ स्वर कहते है। जिनकी कूल संख्या 3 होता है।

मूल या हृस्व स्वरदीर्घ स्वर
अ + अ
इ + इ
उ + उ

(3) संयुक्त स्वर –

दो असमान मूल स्वरों के योग से बने स्वर को संयुक्त स्वर कहते है। जिनकी संख्या कूल 4 होता है।

दो असमान स्वरसंयुक्त स्वर
अ + इ
अ + ए
अ + उ
अ + ओ

व्यंजन (Vyanjan) –

व्यंजन वह ध्वनियाँ होती है, जिनका उच्चारण स्वरों की सहायता से किया जाता है। अर्थात जिन वर्णमाला का उच्चारण स्वरों की सहायता के बिना नहीं हो सकता है उन्हें व्यंजन कहा जाता है।

जैसे – क = क् + अ, ख = ख् + अ आदि।

हिन्दीं वर्णमाला में कूल 41 व्यंजन होते है। लेकिन मूल व्यंजन कूल 33 है।

हिन्दीं वर्णमाला के व्यंजनों को 6 भागों में बाटां जा सकता है।

(1) स्पर्श व्यंजन

(2) अंतःस्थ व्यंजन

(3) उत्क्षिप्त व्यजंन

(4) ऊष्म संघर्षी व्यजन

(5) संयुक्त व्यंजन

(6) आगत व्यजन

(1) स्पर्श व्यंजन या वर्गीय व्यंजन – 

स्पर्श व्यंजन को वर्गीय व्यंजन भी कहते है। क्योकिं, इनका उच्चारण कण्ठ, तालु, मूर्धा, दन्त और ओष्ठ की सहायता से होता है। जिसके कारण इसे स्पर्श व्यंजन या वर्गीय व्यंजन कहते है।

इनकी कूल संख्या 25 होती है। जो मुख्यतः क वर्ग, च वर्ग, ट वर्ग और प वर्ग के व्यंजन होते है।

क वर्गड.
च वर्ग
ट वर्गड़
त वर्ग
प वर्ग

(2) अन्तःस्थ व्यंजन –

इनकी कूल संख्या 4 होती है। इन्हें अन्तःस्थ इसलिए कहते है, क्योंकि ये स्वर एवं व्यंजन के बीच के होते है। इन्हें अर्द्ध स्वर भी कहते है।

(3) ऊष्म व्यंजन –

ऊष्म व्यंजन वे है, जिनका उच्चारण मुखांगों के घर्षण से उत्पन्न ऊष्मा से होता है। इनकी भी संख्या 4 होती है।

(4) संयुक्त व्यंजन-

हिन्दी में चार संयुक्त व्यंजन होते है। जिनका निर्माण दो व्यंजनों के योग से होता है।

क्षत्रज्ञश्र

क्ष = क् + ष

त्र = त्  + र

ज्ञ = ज् + ञ

श्र = श्  + र

(5) उत्क्षिप्त व्यंजन –

हिन्दी वर्णमाला में कूल दो उत्क्षिप्त व्यजन होते है।

ड़ढ़

(6) आगत व्यजन –

इनकी संख्या 2 होती है।

ज़फ़

व्यंजन और स्वरों का उच्चारण –

Trick to Learn Hindi Varnamala and Varn Vichar–

K =  कण्ठ्य (कण्ठ के प्रयोग से)

T = तालव्य (तालु के प्रयोग से।)

M = मूर्द्धन्त (मूर्द्धा अर्थात मुँह के भीतरी भाग के ऊपरी छत के अगले भाग के प्रयोग से।)

D  =  दन्तय

अ = ओष्ठ्य (दोनों ओठों के स्पर्श से)

कण्ठतालव्य = कण्ठ और तालु में जीभ के स्पर्श के द्वारा।

कष्ठोष्ठय = कण्ठ द्वारा जीभ और ओठों के कुछ स्पर्श से।

Hindi Varnamala and Varn Vichar स्वर को याद करने का तरिका –

स्वरस्वरों का उच्चारण

K

T

M


कण्ठतालव्य

कष्ठोष्ठ्य
अंअः

Note – अं और अः दोनों स्वर अयोगवाह ध्वनि के नाम से भी जाने जाते है। जहाँ अं को अनुस्वार और अः को विसर्ग ध्वनि के नाम से जाना जाता है।

Hindi Varnamala and Varn Vichar व्यंजन को याद करने का तरिका –

व्यंजन का उच्चारणव्यंजन का वर्ग12345
Kक वर्गड.
Tच वर्ग
Mट वर्गड़
Dत वर्ग
प वर्ग

1 + 3 + 5 + अंन्तःस्थं व्यंजन (य, र, ल, व) = अल्पप्राण व्यंजन।

2 + 4 + ऊष्म व्यंजन (श, स, ष, ह) = महाप्राण व्यंजन।

1 + 2 + श + ष + स = अघोष वर्ण।

3 + 4 + 5 + य + र + ल + व + ह = सघोष वर्ण।

प्रत्येक वर्ग के 5 वें अक्षर को अनुस्वार, अनुनासिक या पंचमाक्षर के नाम से जानते है।

अंन्तः स्थ व्यंजन –

TMDदन्तोष्ठ्य

उष्म व्यंजन का उच्चारण –

TMDK

प्राण अर्थात वायु की प्रयुक्ति के आधार पर वयंजनों को दो भागों में बाटां गया है।

(1) अल्पप्राण व्यंजन।

(2) महाप्राण व्यंजन।

(1) अल्पप्राण व्यंजन –

प्रत्येक वर्ग के प्रथम, तृतीय और पंचम वर्ण और अन्तःस्थ व्यंजनों को अल्पप्राण व्यंजन कहते है।

1 + 3 + 5 + अंन्तःस्थं व्यंजन (य, र, ल, व) = अल्पप्राण व्यंजन।

(2) महाप्राण व्यंजन –

प्रत्येक वर्ग का द्वितीय तथा चतुर्थ और ऊष्म व्यजनों के समूह को महाप्राण व्यंजन कहते है।

2 + 4 + ऊष्म व्यंजन (श, स, ष, ह)।

आवाज के भारीपन के आधार पर वर्णों को दो भागों में बाटां जा सकता है।

(1) अघोष वर्ण-

अघोष वर्णों का आवाज कम भारी होता है। इसमें निम्न वर्ण आते है।

1 + 2 + श + ष + स।

(2) सघोष वर्ण-

सघोष वर्ण का आवाज अघोष से अधिक भारी होता है। इसमें निम्न वर्ण आते है।

3 + 4 + 5 + य + र + ल + व + ह।

अनुस्वार, अनुनासिक या पंचमाक्षर व्यंजन –

प्रत्येक वर्ग के 5 वें अक्षर को अनुस्वार, अनुनासिक या पंचमाक्षर के नाम से जानते है।

व्यंजन द्वित्व –

जब समान व्यंजन संयुक्त होते है। तब वे व्यंजन द्वित्व कहे जाते है।

जैसे- पक्का, बच्चा, अड्डा, सत्तर अस्सी आदि।

Hindi Varnamala and Varn Vichar

varn vichar kise kehte hain?

हिंदी व्याकरण के तीन भाग होते हैंः- वर्ण विचार, शब्द विचार एवं वाक्य विचार। वर्ण विचार हिन्दी व्याकरण का पहला भाग है जिसमे मुख्यतः भाषा की मूल इकाई ध्वनि तथा वर्ण पर विचार किया जाता है।

what is varn vichar in hindi

वर्ण विचार हिन्दी व्याकरण का पहला भाग होता है जिसमे मुख्यतः भाषा की मूल इकाई ध्वनि तथा वर्ण पर विचार किया जाता है।

what is hindi varnamala?

वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते है।

how many hindi varnamala words?


उच्चारण के अधार पर वर्णमाला दो प्रकार का होता है।
1. Swar
2. Vyanjan.

हिन्दीं वर्णमाला में कूल 41 व्यंजन होते है। लेकिन मूल व्यंजन कूल 33 है। कूल 11 स्वर होते है।

Ram Pal Singh

Hi, This is Ram Pal Singh. I am a Profocinal Blogger and content writer, and Now I am working in the Government Sector in Uttar Pradesh.

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