Indian Council Act 1861

The Indian Council Act 1861 class notes in Hindi के द्वारा भारत में संवैधानिक विकास का सूत्रपात किया गया था। इस अधिनियम के माध्यम से अधोलिखित व्यवस्थाएँ की गई थी।

Indian council act 1861 merits and demerits class notes in Hindi

(1) Council Act 1861 के द्वारा कानून बनाने की प्रक्रिया में भारतीय प्रतिनिधियों को शामिल करने की शुरुआत हुई। जिसके अनुसार वायसराय कुछ भारतीयों को भारत (विस्तारित) परिषद में गैर-सरकारी सदस्यों के रूप में नामंकित कर सकता था। इसी के अनुसार सन् 1862 में लार्ड कैनिंग ने तीन भारतीयों को भारत परिषद में मनोनीत किया।

  • बनारस के राजा 
  • पटियाला के महाराजा
  • सर दिनकर राव

(2) Indian Council Act 1861 के द्वारा गवर्नर जनरल को विधायी कार्यों के लिए नये प्रान्तों में गवर्नर या लेफ्टिनेन्ट गवर्नर को नियुक्त करने का अधिकार दिया गया। उसे किसी प्रान्त प्रेसीडेन्सी या अन्य किसी क्षेत्र को विभाजित करने, अथवा उसकी सीमा में परिवर्तन का अधिकार प्रदान किया गया।  

(3) Indian Council Act 1861 के अधिनियम के आधार पर भारत में सर्वप्रथम विधान परिषद का गठन किया गया। भारत में सबसे पहला विधान परिषद सन् 1862 में बंगाल, दूसरा विधान-परिषद 1866 में उत्तर-पश्चिम प्रांतों और सन् 1897 में पंजाब में विधान परिषद का गठन किया गया।

(4) Indian council act 1861 भारत में उच्च न्यायालय की स्थापना किया गया |

  • जिसके तहत भारत का सबसे पहला उच्च न्यायालय सन् 1862 में बंगाल,
  • दूसरा उच्च न्यायालय सन् 1862 में मद्रास और
  • तिसरा उच्च न्यायालय 1862 में बंबाई में और चौठा उच्च न्यायालय सन् 17 मार्च 1866 में
  • आगरा में स्थापित किया गया जिसके पहले मुख्य न्यायाधिश सर बालटर मॉर्गन थे।

आगरा के उच्च न्यायालय को सन् 1869 में इलाहाबाद को स्थापित किया गया और सन् 1919 मे इसका नाम इलाहाबाद उच्च न्यायालय रखा गया।

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Historical Background Indian Constitution ( in Hindi Notes)

 (5) Indian Council Act 1861 में वायसराय को आपातकाल में बिना काउंसिल की संस्तुति के आधार पर आध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रादन किया गया, या फिर नियम बनाने का अनुमति दी गई। जीसका अवधि 6 माह के लिए होता था। जिसके आधार पर पर वायसराय लॉर्ड केनिंग ने भारत में विभागीय प्रणाली की शुरूआत की। केनिंग ने विभिन्न विभाग  भिन्न-भिन्न सदस्यों को दे दिए, जो उस विभाग के प्रशासन के लिए उत्तरदायी होता था। इस प्रकार भारत में मंत्रिमंडलीय व्यवस्था की नींव पड़ीं।

(6) Indian Council Act 1861 में गवर्नर जनरल की परिषद सप्ताह में एक बार बैठक करती थी, जिसकी अध्यक्षता वायसराय करता था। और इसके साथ भारत में प्रान्तीय विधायिका तथा देश के शासन के विकेन्द्रीकरण का प्रारम्भ हुआ।

1873 का अधिनियम The Act of 1873

 इस अधिनियम के द्वारा यह व्यवस्था किया गया की ईस्ट इंडिया कंपनी को किसी भी समय भंग किया जा सकता है। जिसके अनुसार सन् 1884 में ईस्ट इंडिया कंपनी को औपचारिक रूप में भंग कर दिया गया।

शाही उपाधि अधिनियम 1876

इस अधिनियम के द्वारा गवर्नर जनरल की केन्द्रीय कार्यकारिणी में छठें सदस्य की नियुक्ति कर उसे लोक निर्माण विभाग का कार्य सौंपा गया। और 28 अप्रैल 1876 को एक घोषणा में कहा गया की भारत की सामाज्ञी महारानी विक्टोरिया है।

Ram Pal Singh

Hi, This is Ram Pal Singh. I am a Profocinal Blogger and content writer, and Now I am working in the Government Sector in Uttar Pradesh.

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